ग़ज़ल
मैं अपने देश में रहा
मैं पशोपेश में रहा
सदा तक़लीफ़ में रहा
ज़रा आवेश में रहा
वही होगा मेरा रक़ीब
जो कई वेश में रहा
मैं क्यों ईमानदार हूं
बहुत वो तैश में रहा
न मैं अमीर में रहा
न ही दरवेश में रहा
-संजय ग्रोवर
15-03-2019
मैं अपने देश में रहा
मैं पशोपेश में रहा
सदा तक़लीफ़ में रहा
ज़रा आवेश में रहा
वही होगा मेरा रक़ीब
जो कई वेश में रहा
मैं क्यों ईमानदार हूं
बहुत वो तैश में रहा
न मैं अमीर में रहा
न ही दरवेश में रहा
-संजय ग्रोवर
15-03-2019

