अभी रात की तो बात है कि एन.डी.टी.वी.इण्डिया पर हेमंत करकरे का इण्टरव्यू देखकर हटा हूँ। सुबह हर चैनल पर हाहाकार मचा है। पता चलता है कि जो उच्चाधिकारी पहले-पहल शिकार हो गए उनमें हेमंत करकरे भी थे। आपको याद हो तो ए.टी.एस. की जांच में जो राज़ खुले उनमें एक यह भी था कि ले.कर्नल प्रसाद पुरोहित को आर. डी. एक्स. की सप्लाई कश्मीर के किसी गिलानी से मिल रही थी।आगे चलें। यानि कि थोड़ा पीछे जाएं।
जिस दिन तहलका नानावती आयोग की रपट के बाद अपने स्टिंग आॅपरेशन को लेकर एक प्रेस-कान्फ्रेंस कर रहा होता है उसी दिन दिल्ली के एक बाज़ार में दो आतंकवादी मोटर-बाइक पर आकर बम फेंक देते हैं। तहलका की प्रेस-काॅन्फ्रेंस उस में धुल जाती है।
थोड़ा और पीछे जाएं।
एक दिन देव-मूर्तियां दूध पीने लगती हैं। दूसरे दिन समुद्र का पानी मीठा हो जाता है। तीसरे दिन मरियम की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
थोड़ा विश्लेषण करें।
एक कहता है कि बाबरी मस्जिद गिरी इसलिए 93 के दंगे हुए। दूसरा कहता है कि गोधरा हुआ इसलिए गुजरात हुआ।
एक कट्टरपंथ से ही दूसरा कट्टरपंथ जस्टीफाई होता है।
एक के रहने से ही दूसरे की ‘दुकान’ चलती है।
एक कट्टरपंथ नहीं होगा तो दूसरा क्या कहकर अपना औचित्य सिद्ध करेगा ?
अगर पाकिस्तान और मुसलमान ख़त्म हो जाएं तो बहुत सारे कट्टर हिंदुओं के तो ‘रोज़गार’ ही छिन जाएंगे। यही हाल हिन्दुस्तान के साथ होने पर पाकिस्तानी कठमुल्लों का होगा।
विभिन्न धर्मों के राजनेताओं के गठजोड़ तो ‘देव’ और ‘फ़िज़ा’ जैसी नई-पुरानी फ़िल्मों में दिखाए जा चुके हैं।
पर कट्टरमुल्लाओं का क्या ?
कट्टरपंथी और कठमुल्ला को जोड़कर यह (कट्टरमुल्ला) शब्द बनाया है। जिससे कि मुझे कोई धर्मविशेष का पक्षधर न समझ ले।
तो क्या एक संभावना यह भी हो सकती है कि कट्टरमुल्लाओं का कोई अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ हो जो कभी-कभी एक-दूसरे से हाथ मिलाकर भी काम कर लेता हो!
क्या कट्टरपंथी ऐसे ही सारी दुनिया को तबाह करते जाएंगे।
अगर हमें सचमुच देश की और मानवता की चिंता है तो हमें इन सवालों से भी दो-चार होना चाहिए।
अगर हमें सिर्फ नारेबाज़ी, अफ़वाहबाज़ी, तोड़-फोड़ और षड्यंत्रबाज़ी ही करनी है तो बात और है।
-संजय ग्रोवर