रविवार, 8 फ़रवरी 2009

व्यंग्य-कक्ष में*****गज़-भर एक्सक्लूसिव*****


गज़-भर चैनल पर खबरों का सजीव प्रसारण चल रहा है। अचानक स्क्रीन के ऊपरी कोने में ‘ब्रेकिंग-न्यूज़’ की पट्टी चमकती है। तुरंत पश्चात् निचले कोने में गज़-भर ऐक्सक्लूसिव का पट्टा आ विराजता है।

अलसाई आवाज़ में खबरें पढ़ रहा चिकना-चमका न्यूज़-रीडर उत्साह से भर उठता है, ‘अभी-अभी खबर मिली है कि राजधानी के स्वतंत्रता चौक पर सरे-आम, दिन-दहाड़े एक युवती के साथ बलात्कार किया जा रहा है ।’

दड़ियल-तिनका न्यूज़-रीडर, ‘और आपको जान कर खुशी होगी कि आपके प्रिय चैनल का संवाददाता सबसे पहले वहां पहुंचा है। आईए ,सीधे, लाइव कवरेज के लिए आपको वहीं लिए चलते हैं जहां मौजूद हैं हमारे रिपोर्टर मुखर खामोश । 'मुखर, हमारे दर्शकों को बताईए कि अब वहां क्या स्थिति है?’

मुखर,‘हां मैं इनसे पूछ रहा हूं, मैडम,आप यहां कबसे हैं ? आपका नाम क्या है? पहले तो आप हमारे दर्शकों को अपना नाम बताएं! आप यहां क्यों आयी थीं ? और अब आप कैसा महसूस कर रही हैं?’

युवती कराहती है. लगता है ‘कोई मुझे बचाओ’ जैसा कुछ बुदबुदा रही है।
दड़ियल-तिनका, ‘आप देख रहें हैं कि वे अपना नाम तक नहीं बता पा रहीं हैं। मुखर,हम आपसे फिर संपर्क करेंगे. इस बीच स्टूडियो में हमारे बीच मौजूद हैं ‘नारी-उत्थान’ संस्था की प्रमुख प्रगति जी और ‘देवी-वाहिनी’ की सुश्री कंचनलता जी । प्रगतिजी पहले आप बताईए कि दिन-दहाड़े, इस तरह से एक देश की राजधानी में यह सब हो रहा है, सब चुपचाप देख रहे हैं. कानून-व्यवस्था की मौजूदा हालत और समाज के ऐसे नैतिक पतन पर आप क्या कहना चाहेंगी?’

प्रगति,‘मैं आपके सवाल का जवाब बाद में दूंगी । यह वक़्त सवाल-जवाब का नहीं है। पहले आप मुखर जी से कहें कि किसी तरह उस युवती को बचाएं । अन्यथा मुझे इस बारे में सोचना होगा ।’

चिकना-चमका, ‘धन्यवाद प्रगति जी, इस पर विस्तार से बात हम आपसे बाद में करेंगे । फिलहाल वक्त है एक छोटे से ब्रेक का । ब्रेक के बाद एक बार फिर हम ले चलेंगे आपको स्वतंत्रता चौक पर जहां कि यह बलात्कार हो रहा है, किया जा रहा है । तो तैयार रहें लाइव कवरेज के लिए ।’

- ब्रेक -

मुखर, ‘तिनका, जैसा कि आप देख रहे हैं, यहां काफी भीड़ है। सभी लोग उतावले हैं।नजदीक से देखना चाहते हैं। पुलिस उन्हे पीछे हटाने की पूरी कोशिश कर रही है। मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं बलात्कारी युवक से बात करने की। और चमका, मैं पुलिस की मदद से यहां तक पहुंच गया हूं । आईए, हम बलात्कारी युवक से थोड़ी बातें करते हैं :


मुखर,‘क्या आप अपना नाम हमारे दर्शकों को बताएंगे?’
बलात्कारी, ‘दैट डज़न्ट मैटर ।’
मुखर, ‘आपकी जाति ? वर्ण ?’
बलात्कारी, ‘बोला न दैट डज़न्ट मैटर ।’
मुखर, ‘आप किसके लड़के हैं, किसी नेता, मंत्री, ब्यूरोक्रेट या व्यापारी के ?’
बलात्कारी, ‘अरे! हट परे यार, एक बार में समझ नहीं आती क्या तेरे को!’

- ब्रेक -
दड़ियल-तिनका, ‘इस बीच महिला संस्थाओं की प्रतिनिधि अभी भी हमारे बीच स्टूडियो में मौजूद हैं । कंचनलता जी, आप क्या कहना चाहेंगी इस पूरे प्रकरण पर !’

कंचनलता, ‘पहले तो जैसा प्रगति जी ने कहा हमें किसी तरह उस युवती को बचाना चाहिए, जैसी भी है हमारे देश की बेटी है । दूसरे, मैं कहूंगी कि दिन-दहाडे़ सड़क पर इस तरह के कपड़े पहन कर घूमना..........
चिकना-चमका, ‘इस बीच मैं अपने दर्शकों को बताना चाहूंगा कि आपके प्रिय चैनल का संवाददाता ही घटना-स्थल पर सबसे पहले पहुंचा............
तभी बिजली गुल हो जाती है. दर्शकों के लिए अब यही एकमात्र राहत है । या कहें कि स्त्रियों के लिए राहत है और पुरूषों का मज़ा किरकिरा हो चुका है।

-संजय ग्रोवर

(हंस, मई 2003 में प्रकाशित)

6 टिप्‍पणियां:

  1. कमाल है। 6 वर्ष पहले ही आज की कल्‍पना कितनी स्‍पष्‍टता से कर ली गई थी यह आपकी इस पोस्‍ट से अनुभव हो पाता है।
    पीडादायक है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut marmik. chenalon ki exclusive khabar ki hod main kuchh bhi kar gujarne or samajik daitv ko bhula dene par bahut hi jabardast chot. yah rachana jab hans main chhapi thi tab bhi meri pasand thi, khabriya cenlon par nikle vishehank vaqt hai ek break ka main bhi achhi lagi thi or aaj yahan par bhi man ko chhoo gayee.

    उत्तर देंहटाएं
  3. cool post this.. has humour, sense , emotion and reality into it.. good work.. (sorry couldn't comment in hindi)

    उत्तर देंहटाएं
  4. Thanks.
    and No Problem..
    aapne hindi padh li yeh bhi koi kum badi baat nahiN hai.

    उत्तर देंहटाएं

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

पुराने पोस्ट पढने के लिए इस पोस्ट के नीचे दाएं ‘पुराने पोस्ट’ पर क्लिक करें-

ख़ुद फंसोगे हमें भी फंसाओगे!

Protected by Copyscape plagiarism checker - duplicate content and unique article detection software.

ढूंढो-ढूंढो रे साजना अपने काम का मलबा.........

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (1) अंधविश्वास (1) अनुसरण (1) अफवाहें (1) असमंजस (2) अस्पताल (1) अहिंसा (2) आंदोलन (4) आतंकवाद (2) आत्म-कथा (3) आत्मविश्वास (2) आत्मविश्वास की कमी (1) आध्यात्मिकता (1) आरक्षण (3) आवारग़ी (1) इंटरनेट की नयी नैतिकता (1) इंटरनेट पर साहित्य की चोरी (2) इंसान (1) इतिहास (1) इमेज (1) ईमानदार (1) ईमानदारी (1) ईमेल (1) ईश्वर (5) उत्कंठा (2) उत्तर भारतीय (1) उदयप्रकाश (1) उपाय (1) उल्टा चोर कोतवाल को डांटे (1) ऊंचाई (1) ऊब (1) एक गेंद करोड़ों पागल (1) एकतरफ़ा रिश्ते (1) ऐंवेई (2) ऐण्टी का प्रो (1) औरत (1) औरत क्या करे (3) औरत क्या करे ? (3) कचरा (1) कट्टरपंथ (2) कट्टरमुल्लापंथी (1) कठपुतली (1) कम्युनिज़्म (1) कविता (57) क़ाग़ज़ (1) कार्टून (3) कुंठा (1) कुण्ठा (1) क्रांति (1) क्रिकेट (2) ख़ज़ाना (1) खामख्वाह (2) खीज (1) खेल (1) गज़ल (4) ग़जल (1) ग़ज़ल (26) गाना (2) गाय (2) ग़ायब (1) गीत (2) ग़ुलामी (1) गौ दूध (1) चमत्कार (2) चरित्र (3) चलती-फिरती लाशें (1) चालू (1) चिंतन (1) चिंता (1) चिकित्सा-व्यवस्था (1) चुनाव (1) चुहल (2) चोरी और सीनाज़ोरी (1) छप्पर फाड़ के (1) छोटा कमरा बड़ी खिड़कियां (3) जड़बुद्धि (1) ज़बरदस्ती के रिश्ते (1) जागरण (1) जाति (1) जातिवाद (2) जानवर (1) ज़िंदगी (1) जीवन (1) ज्ञान (1) टॉफ़ी (1) डर (3) डायरी (3) डीसैक्सुअलाइजेशन (1) ढिठाई (2) ढोंगी (1) तंज़ (10) तन्हाई (1) तर्क (2) तसलीमा नसरीन (1) ताज़ा-बासी (2) तोते (1) दबाव (1) दमन (1) दयनीय (1) दर्शक (1) दलित (1) दिमाग़ (1) दिमाग़ का इस्तेमाल (1) दिल की बात (1) दिल से (1) दिल से जीनेवाले (1) दिल-दिमाग़ (1) दिलवाले (1) दुनियादारी (1) दूसरा पहलू (1) देश (1) देह और नैतिकता (6) दोबारा (1) दोमुंहापन (1) दोस्त (1) दोहरे मानदंड (3) दोहरे मानदण्ड (14) दोहा (1) दोहे (1) धर्म (1) धर्मग्रंथ (1) धर्मनिरपेक्ष प्रधानमंत्री (1) धर्मनिरपेक्षता (4) धारणा (1) धार्मिक वर्चस्ववादी (1) नकारात्मकता (1) नक्कारखाने में तूती (1) नज़्म (4) नज़्मनुमा (1) नज़्मनुमां (1) नफरत की राजनीति (1) नया (2) नाथूराम (1) नाथूराम गोडसे (1) नाम (1) नास्तिक (6) नास्तिकता (2) निरपेक्षता (1) निराकार (2) निष्पक्षता (1) पक्ष (1) परंपरा (3) परतंत्र आदमी (1) परिवर्तन (4) पशु (1) पहेली (3) पाखंड (7) पाखंडी (1) पाखण्ड (6) पागलपन (1) पिताजी (1) पुरस्कार (2) पैंतरेबाज़ी (1) प्रगतिशीलता (2) प्रतिष्ठा (1) प्रयोग (1) प्रायोजित (1) प्रेम (2) प्रेरणा (2) प्रोत्साहन (2) फ़क्कड़ी (1) फालतू (1) फ़िल्मी गाना (1) फ़ेसबुक-प्रेम (1) फैज़ अहमद फैज़्ा (1) फ़ैन (1) बंद करो पुरस्कार (2) बच्चन (1) बजरंगी (1) बड़ा (1) बदमाशी (1) बदलाव (4) बहस (15) बहुरुपिए (1) बासी (1) बिजूके (1) बिहारी (1) बेईमान (1) बेशर्मी (2) बेशर्मी मोर्चा (1) बेहोश (1) ब्लाॅग का थोड़ा-सा और लोकतंत्रीकरण (3) ब्लैकमेल (1) भक्त (1) भगवान (2) भारत का चरित्र (1) भारत का भविष्य (1) भावनाएं और ठेस (1) भीड़ (1) भ्रष्टाचार (7) मंज़िल (1) मनोरोग (1) मनोविज्ञान (6) मर्दानगी (1) महात्मा गांधी (3) महानता (1) मां (1) माता (1) मानवता (1) मान्यता (1) मूर्खता (3) मूल्य (1) मेरिट (2) मौक़ापरस्त (2) मौक़ापरस्ती (1) मौलिकता (1) युवा (1) योग्यता (1) रंगबदलू (1) रचनात्मकता (1) रद्दी (1) रहस्य (2) राज़ (1) राजनीति (4) राजेंद्र यादव (1) राजेश लाखोरकर (1) राष्ट्र-प्रेम (3) राष्ट्रप्रेम (1) रास्ता (1) रिश्ता और राजनीति (1) रुढ़ि (1) रुढ़िवाद (1) रुढ़िवादी (1) रोज़गार (1) लघु कथा (1) लघु व्यंग्य (1) लघुकथा (7) लघुव्यंग्य (2) लालच (1) लोग क्या कहेंगे (1) वामपंथ (1) विचार की चोरी (1) विज्ञापन (1) विवेक (1) विश्वगुरु (1) वेलेंटाइन डे (1) वैलेंटाइन डे (1) व्यंग्य (80) व्यंग्य कथा (1) व्यंग्यकथा (1) व्यंग्यचित्र (1) शब्द और शोषण (1) शरद जोशी (1) शराब (1) शातिर (2) शायद कोई समझे (1) शायरी (45) शायरी ग़ज़ल (1) शेरनी का दूध (1) संगीत (2) संघर्ष (1) संजय ग्रोवर (3) संदिग्ध (1) संस्मरण (3) सकारात्मकता (1) सच (1) सड़क (1) सपना (1) सफ़र (1) समझ (2) समाज (6) समाज की मसाज (39) सर्वे (1) सवाल (3) सवालचंद के चंद सवाल (9) सांप्रदायिकता (5) साकार (1) साभार (3) साहित्य (1) साहित्य की दुर्दशा (5) साहित्य में आतंकवाद (17) स्त्री-विमर्श के आस-पास (19) स्लट वॉक (1) हमारे डॉक्टर (1) हल (1) हास्य (2) हास्यास्पद (1) हिंदी दिवस (1) हिंदी साहित्य में भीड/भेड़वाद (2) हिंदी साहित्य में भीड़/भेड़वाद (5) हिंसा (1) हिन्दुस्तानी चुनाव (1) होलियाना हरकतें (2) active deadbodies (1) animal (1) atheism (1) audience (1) awards (1) Blackmail (1) chameleon (1) character (1) communism (1) cow (1) cricket (1) cunning (1) devotee (1) dishonest (1) Doha (1) dreams (1) employment (1) experiment (1) fan (1) fear (1) forced relationships (1) formless god (1) friends (1) funny (1) funny relationship (1) ghazal (12) god (1) gods of atheists (1) greatness (1) hindi literature (3) Hindi Satire (8) history (1) humanity (1) Humour (3) hypocrisy (3) hypocritical (2) innovation (1) IPL (1) life (1) literature (1) logic (1) Loneliness (1) lyrics (3) mob (1) movements (1) music (2) name (1) one-way relationships (1) opportunist (1) opportunistic (1) oppressed (1) paper (1) parrots (1) pathetic (1) pawns (1) plagiarism (1) poem (1) poetry (19) pressure (1) prestige (1) puppets (1) radicalism (1) Rajesh Lakhorkar (1) rationality (1) royalty (1) sanctimonious (1) Sanjay Grover (1) satire (22) secret (1) senseless (1) short story (4) slavery (1) song (2) sponsored (1) spoon (1) stature (1) The father (1) The gurus of world (1) tradition (1) trash (1) travel (1) ultra-calculative (1) values (1) verse (3) vicious (1) woman (1) world cup (1)

देयर वॉज़ अ स्टोर रुम या कि दरवाज़ा-ए-स्टोर रुम....