रविवार, 5 दिसंबर 2010

एक ही डिब्बी के

‘ओए, जो हमारे दल का नहीं
देशद्रोही है,
पीट-पीटकर मार डालूंगा’
इक्कू ने कहा

‘स्साल्ले ! हमारी हां में हां नहीं मिलाता !
सांप्रदायिक घोषित कर दूंगा
गाली देकर भगा दूंगा
नहीं मानेगा तो गोली भी चलवा दूंगा’
यह आया दुक्कू

तिक्कू की बात और भी मज़ेदार
‘हमारे गुट में नहीं आएगा
तो गुटबाज़ घोषित कर दूंगा’

हंसें तो फ़ंसें आप
ये सब तो हैं बहुत गंभीर

अभी देखना आएंगे कुछ हाथ
कुछ वाद कुछ पंथ कुछ संघ
कुछ खुले कुछ तंग
कुछ ये कुछ वो.. (उफ़ !)

इनसे खेलेंगे
इन्हें फ़ेंटेंगे
इन्हें फ़ेंकेंगे
तुरुप बनाएंगे

खेलते-खेलते
अंततः थक जाएंगे

इन्हें समेटकर
डाल देंगे एक डिब्बी में

और पता है फिर वे क्या करेंगे !
जाकर वे भी किसी डिब्बी में सो जाएंगे

आप हंसें तो फ़ंसें
सोचें तो सिर नोचें

चलिए आप और हम
उस डिब्बी का पता लगाएं

पर उसके लिए
हमें डिब्बी से बाहर निकलना होगा !

-संजय ग्रोवर

21 टिप्‍पणियां:

  1. जितनी सरलता से और तरलता से आपने यह सुन्दर रचना की है वह मेधा बधाई की पात्र है

    उत्तर देंहटाएं
  2. संजय ग्रोवर जी की सन्देश देती हुई रचना बहुत बढ़िया लगी!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सटीक व्यंग्य... व्यवस्था पर और उनपर जिन्होंने ख़ुद को यह व्यवस्था दी!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut khoob, lekin kya hamaare yehaN ke NAMAK maiN kuch haraarat baqi hai?

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत संवेदनशील अभिव्यक्ति ! एक निर्मम यथार्थ को उजागर करती बेहतरीन रचना ! बधाई एवं शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  6. पर उसके लिये हमें डिब्बी से बाहर निकलना होगा।

    अच्छी रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस कविता में सत्ता निर्माताओं के प्रति बेखौफ असहमति है , व्‍यंजना और लक्षणा में भी । शब्‍दों में आक्रोश है । कविता में वैचारिक और संवेदना की युगलबंदी देखने लायक है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    विचार-प्रायश्चित

    उत्तर देंहटाएं
  8. हर आदम इक डिब्‍बा है और उसकी कोई डिब्‍बी है
    ताजी श्‍वॉंस उसी को मिलती जिसने खोली डिब्‍बी है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. दिल जीत लिया रे!
    इक्कू, दुक्कू, तिक्कू और डिब्बी को लेकर एक खतरनाक संत्रासी टाइप फंतासी रची जा सकती है। लिखिए न!

    -गिरिजेश राव

    (VIA EMAIL)

    उत्तर देंहटाएं
  10. tash ke patto ko kitne pyare dhang se aapne sabdo me sameta ...........

    ekke dukke tikke...........mamaj ke numainde..:P

    उत्तर देंहटाएं
  11. इक्कू दुक्कू और टिक्कू के बाद बचता ही क्या है सुवा चक्कू के...निकालो और घुसेड दो...

    धारदार व्यंग रचना...ऐसे लेखन में आप लाजवाब हो जी.


    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  12. Hum Sab log bhi inhi patto ke saman hai, ek dusre ke saath bhi aur ek dusre ek virodhi bhi, par anth me ek hi asmaan ke hi niche rahte hai hum log,

    Phir ek dusre se bhair kyu

    उत्तर देंहटाएं
  13. जनाब सार्थक व्यंग, अनूठा पत्तों के सहारे लिखा सच शायद पहलीबार देखा .शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  14. ये तो हुई वो बात के अंदर के भी अंदर है कुछ.........
    बहुत खूब संजय भाई........बधाई|

    उत्तर देंहटाएं
  15. संजय भाई, बहुत गहरी बात कर दी आपने। बधाई।

    'तस्‍लीम' पर आपके विचारों के लिए आभार। आप उसके फॉलोअर साइडबार में लगे विजेट के द्वारा भी बन सकते हैं।

    ---------
    अंधविश्‍वासी तथा मूर्ख में फर्क।
    मासिक धर्म : एक कुदरती प्रक्रिया।

    उत्तर देंहटाएं

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

पुराने पोस्ट पढने के लिए इस पोस्ट के नीचे दाएं ‘पुराने पोस्ट’ पर क्लिक करें-

ख़ुद फंसोगे हमें भी फंसाओगे!

Protected by Copyscape plagiarism checker - duplicate content and unique article detection software.

ढूंढो-ढूंढो रे साजना अपने काम का मलबा.........

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (1) अंधविश्वास (1) अनुसरण (1) अफवाहें (1) असमंजस (2) अस्पताल (1) अहिंसा (2) आंदोलन (4) आतंकवाद (2) आत्म-कथा (3) आत्मविश्वास (2) आत्मविश्वास की कमी (1) आध्यात्मिकता (1) आरक्षण (3) आवारग़ी (1) इंटरनेट की नयी नैतिकता (1) इंटरनेट पर साहित्य की चोरी (2) इंसान (1) इतिहास (1) इमेज (1) ईमानदार (1) ईमानदारी (1) ईमेल (1) ईश्वर (5) उत्कंठा (2) उत्तर भारतीय (1) उदयप्रकाश (1) उपाय (1) उल्टा चोर कोतवाल को डांटे (1) ऊंचाई (1) ऊब (1) एक गेंद करोड़ों पागल (1) एकतरफ़ा रिश्ते (1) ऐंवेई (2) ऐण्टी का प्रो (1) औरत (1) औरत क्या करे (3) औरत क्या करे ? (3) कचरा (1) कट्टरपंथ (2) कट्टरमुल्लापंथी (1) कठपुतली (1) कम्युनिज़्म (1) कविता (57) क़ाग़ज़ (1) कार्टून (3) कुंठा (1) कुण्ठा (1) क्रांति (1) क्रिकेट (2) ख़ज़ाना (1) खामख्वाह (2) खीज (1) खेल (1) गज़ल (4) ग़जल (1) ग़ज़ल (26) गाना (2) गाय (2) ग़ायब (1) गीत (2) ग़ुलामी (1) गौ दूध (1) चमत्कार (2) चरित्र (3) चलती-फिरती लाशें (1) चालू (1) चिंतन (1) चिंता (1) चिकित्सा-व्यवस्था (1) चुनाव (1) चुहल (2) चोरी और सीनाज़ोरी (1) छप्पर फाड़ के (1) छोटा कमरा बड़ी खिड़कियां (3) जड़बुद्धि (1) ज़बरदस्ती के रिश्ते (1) जागरण (1) जाति (1) जातिवाद (2) जानवर (1) ज़िंदगी (1) जीवन (1) ज्ञान (1) टॉफ़ी (1) डर (3) डायरी (3) डीसैक्सुअलाइजेशन (1) ढिठाई (2) ढोंगी (1) तंज़ (10) तन्हाई (1) तर्क (2) तसलीमा नसरीन (1) ताज़ा-बासी (2) तोते (1) दबाव (1) दमन (1) दयनीय (1) दर्शक (1) दलित (1) दिमाग़ (1) दिमाग़ का इस्तेमाल (1) दिल की बात (1) दिल से (1) दिल से जीनेवाले (1) दिल-दिमाग़ (1) दिलवाले (1) दुनियादारी (1) दूसरा पहलू (1) देश (1) देह और नैतिकता (6) दोबारा (1) दोमुंहापन (1) दोस्त (1) दोहरे मानदंड (3) दोहरे मानदण्ड (14) दोहा (1) दोहे (1) धर्म (1) धर्मग्रंथ (1) धर्मनिरपेक्ष प्रधानमंत्री (1) धर्मनिरपेक्षता (4) धारणा (1) धार्मिक वर्चस्ववादी (1) नकारात्मकता (1) नक्कारखाने में तूती (1) नज़्म (4) नज़्मनुमा (1) नज़्मनुमां (1) नफरत की राजनीति (1) नया (2) नाथूराम (1) नाथूराम गोडसे (1) नाम (1) नास्तिक (6) नास्तिकता (2) निरपेक्षता (1) निराकार (2) निष्पक्षता (1) पक्ष (1) परंपरा (3) परतंत्र आदमी (1) परिवर्तन (4) पशु (1) पहेली (3) पाखंड (7) पाखंडी (1) पाखण्ड (6) पागलपन (1) पिताजी (1) पुरस्कार (2) पैंतरेबाज़ी (1) प्रगतिशीलता (2) प्रतिष्ठा (1) प्रयोग (1) प्रायोजित (1) प्रेम (2) प्रेरणा (2) प्रोत्साहन (2) फ़क्कड़ी (1) फालतू (1) फ़िल्मी गाना (1) फ़ेसबुक-प्रेम (1) फैज़ अहमद फैज़्ा (1) फ़ैन (1) बंद करो पुरस्कार (2) बच्चन (1) बजरंगी (1) बड़ा (1) बदमाशी (1) बदलाव (4) बहस (15) बहुरुपिए (1) बासी (1) बिजूके (1) बिहारी (1) बेईमान (1) बेशर्मी (2) बेशर्मी मोर्चा (1) बेहोश (1) ब्लाॅग का थोड़ा-सा और लोकतंत्रीकरण (3) ब्लैकमेल (1) भक्त (1) भगवान (2) भारत का चरित्र (1) भारत का भविष्य (1) भावनाएं और ठेस (1) भीड़ (1) भ्रष्टाचार (7) मंज़िल (1) मनोरोग (1) मनोविज्ञान (6) मर्दानगी (1) महात्मा गांधी (3) महानता (1) मां (1) माता (1) मानवता (1) मान्यता (1) मूर्खता (3) मूल्य (1) मेरिट (2) मौक़ापरस्त (2) मौक़ापरस्ती (1) मौलिकता (1) युवा (1) योग्यता (1) रंगबदलू (1) रचनात्मकता (1) रद्दी (1) रहस्य (2) राज़ (1) राजनीति (4) राजेंद्र यादव (1) राजेश लाखोरकर (1) राष्ट्र-प्रेम (3) राष्ट्रप्रेम (1) रास्ता (1) रिश्ता और राजनीति (1) रुढ़ि (1) रुढ़िवाद (1) रुढ़िवादी (1) रोज़गार (1) लघु कथा (1) लघु व्यंग्य (1) लघुकथा (7) लघुव्यंग्य (2) लालच (1) लोग क्या कहेंगे (1) वामपंथ (1) विचार की चोरी (1) विज्ञापन (1) विवेक (1) विश्वगुरु (1) वेलेंटाइन डे (1) वैलेंटाइन डे (1) व्यंग्य (80) व्यंग्य कथा (1) व्यंग्यकथा (1) व्यंग्यचित्र (1) शब्द और शोषण (1) शरद जोशी (1) शराब (1) शातिर (2) शायद कोई समझे (1) शायरी (45) शायरी ग़ज़ल (1) शेरनी का दूध (1) संगीत (2) संघर्ष (1) संजय ग्रोवर (3) संदिग्ध (1) संस्मरण (3) सकारात्मकता (1) सच (1) सड़क (1) सपना (1) सफ़र (1) समझ (2) समाज (6) समाज की मसाज (39) सर्वे (1) सवाल (3) सवालचंद के चंद सवाल (9) सांप्रदायिकता (5) साकार (1) साभार (3) साहित्य (1) साहित्य की दुर्दशा (5) साहित्य में आतंकवाद (17) स्त्री-विमर्श के आस-पास (19) स्लट वॉक (1) हमारे डॉक्टर (1) हल (1) हास्य (2) हास्यास्पद (1) हिंदी दिवस (1) हिंदी साहित्य में भीड/भेड़वाद (2) हिंदी साहित्य में भीड़/भेड़वाद (5) हिंसा (1) हिन्दुस्तानी चुनाव (1) होलियाना हरकतें (2) active deadbodies (1) animal (1) atheism (1) audience (1) awards (1) Blackmail (1) chameleon (1) character (1) communism (1) cow (1) cricket (1) cunning (1) devotee (1) dishonest (1) Doha (1) dreams (1) employment (1) experiment (1) fan (1) fear (1) forced relationships (1) formless god (1) friends (1) funny (1) funny relationship (1) ghazal (12) god (1) gods of atheists (1) greatness (1) hindi literature (3) Hindi Satire (8) history (1) humanity (1) Humour (3) hypocrisy (3) hypocritical (2) innovation (1) IPL (1) life (1) literature (1) logic (1) Loneliness (1) lyrics (3) mob (1) movements (1) music (2) name (1) one-way relationships (1) opportunist (1) opportunistic (1) oppressed (1) paper (1) parrots (1) pathetic (1) pawns (1) plagiarism (1) poem (1) poetry (19) pressure (1) prestige (1) puppets (1) radicalism (1) Rajesh Lakhorkar (1) rationality (1) royalty (1) sanctimonious (1) Sanjay Grover (1) satire (22) secret (1) senseless (1) short story (4) slavery (1) song (2) sponsored (1) spoon (1) stature (1) The father (1) The gurus of world (1) tradition (1) trash (1) travel (1) ultra-calculative (1) values (1) verse (3) vicious (1) woman (1) world cup (1)

देयर वॉज़ अ स्टोर रुम या कि दरवाज़ा-ए-स्टोर रुम....