गुरुवार, 20 अगस्त 2009

ग़ज़ल जो ढंग से नहीं छपी ! यहां छपी क्या खू़ब छपी !


ग़ज़ल

बह गया मैं भावनाओं में कोई ऐसा मिला
फ़िर महक आई हवाओं में कोई ऐसा मिला

खो के पाना पा के खोना खेल जैसा हो गया
लुत्फ़ जीने की सज़ाओं में कोई ऐसा मिला

खो गए थे मेरे जो वो सारे सुर वापिस मिले
एक सुर उसकी सदाओं में कोई ऐसा मिला

हमको बीमारी भली लगने लगी, ऐसा भी था
दर्द मीठा-सा, दवाओं में कोई ऐसा मिला

रेत में भी बीज बो देने का मन होने लगा
मेघ आशा का घटाओं में कोई ऐसा मिला

-संजय ग्रोवर

10 टिप्‍पणियां:

  1. चलो आज फिर मन बाग़-बाग़ हो गया....आज फिर हमें कोई ग़ज़ल-ख्वाहं मिला....!!
    हमने उसकी हर नज़र उतार दी अगर ...कोई भी जो रस्ते में हमें गता हुआ मिला...!!

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  2. bohut sunder......हमको बीमारी भली लगने लगी, ऐसा भी था
    दर्द मीठा-सा, दवाओं में कोई ऐसा मिला....

    उत्तर देंहटाएं
  3. खो के पाना पा के खोना खेल जैसा हो गया
    लुत्फ़ जीने की सज़ाओं में कोई ऐसा मिला

    अच्छी गजल संजय जी।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. पढ़ने वाले भर गए थे, फूल के एहसास से |
    प्यार में खोकर लिखी है, ये ग़ज़ल ऐसा लगा |

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  5. रेत में भी बीज बो देने का मन होने लगा
    मेघ आशा का घटाओं में कोई ऐसा मिला
    क्या बात है. आपकी गज़लें सचमुच बहुत सुन्दर होतीं हैं.

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  6. वाह..वाह.. ग्रोवर जी।
    बहुत खूब गज़ल लिखी है।
    बधाई।

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  7. बहुत खूब अंदाज है रेत में भी बीज बो देने का मन होने लगा...

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  8. फ़िर महक आई हवाओं में कोई ऐसा मिला...आपका अन्दाजें बयां कुछ और है ...भाव एक शिखर पर ले जातें हें जहाँ से लौटने का मतलब एक लाचारी और यंत्रणा से गुजरना होता है ....आपको हंस में हमेशा ही पढ़ती रही हूँ ...कुछ गजलों का प्रकाशन भी किया था

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  9. megh asha ka ghatao me koi aisa mila.......
    wah!grover sahab kitna narm ahasas hai in shabdo me........badhai swikare

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  10. "खो के पाना पा के खोना खेल जैसा हो गया,
    लुत्फ़ जीने की सज़ाओं में कोई ऐसा मिला|

    खो गए थे मेरे जो वो सारे सुर वापिस मिले,
    एक सुर उसकी सदाओं में कोई ऐसा मिला|"
    ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगीं...बहुत बहुत बधाई...

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कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

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