Monday, March 9, 2009

‘‘होली विशेषांक’’

दोस्तो, होली-विशेषांक के लिए काफी तैयारी करनी पड़ी। दिल में धुकुर-धुकुर मची थी कि सही वक्त पर निकाल पाएंगे या नहीं ! पर अंतत: हम इसमें कामयाब हुए। लीजिए, अब यह आपके हाथों में है। पढ़िए, मज़ा लीजिए और टीपें छोड़िए कि कैसा लगा -
















अनावश्यक निर्देश:-
अगर फांट की दिक्कत हो रही हो तो कीबोर्ड उठाकर सिर में मारिए।


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अनावश्यक निर्देश:-
अगर अभी भी पढ़ने को कुछ मिला हो तो सी।पी.यू. खोलकर उसमें घुस जाईए।


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अंतिम निर्देश:-अगर अभी भी कुछ नहीं मिलता तो समझ लीजिए आपको बु/फु/कुद्धू (तरंग में सही शब्द भूल गया हूं) बनाया गया है।


BURA NA MAANO HOLI HAI!

25 टिप्पणियाँ:

नीरज गोस्वामी said...

हम भी बु/फु/कुद्धू (तरंग में सही शब्द भूल गया हूं) बन कर खूब आनंदित हुए.
होली की ढेरों रंग बिरंगी शुभकामनाएं.
नीरज

sanjaygrover said...

AAPKO BHI, NEERAJ JI. JAO AISH KARO.

Udan Tashtari said...

निर्देशों का पालन किया और अब कैफे आना पड़ा टिप्पणी करने...:)

होली की बहुत बधाई एवं मुबारक़बाद !!!

sanjaygrover said...

उड़न तश्तरी जी, अब पंछी बनो, उड़ते फिरो मस्त गगन मेंऽऽऽऽऽऽ
आपने कैफे आने की ज़हमत उठाई, बहुत-बहुत आभार, होली बहुत-बहुत मुबारक !

neeshoo said...

ये तरीका अच्छा रहा । काफी मेहनत की है आपने दिखाई दे गयी । मस्त माहौल में मनाइये । होली की शुभकामनाएं।

suraj khanna said...

होली के भांग मे ये गुण है भइया की लोग बहुत कुछ भूल जाते है , आपने तो सिर्फ़ फॉण्ट भूले है ..होली की अबीर आपके गालों पे .........मेरी तरफ़ से लगा लीजिएगा ...शुभकामनाए

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

सीपीयू से बाहर कैसे निकलूं वापस :)

Archana said...

गिनीज बुक मे दिये या नही?????? सबसे छोटे ,बिना पन्नों के " ःऒळॊईशःऎशःआण्ख " के बारे में?????????
आपको भी "ःऒळी - ंऊभाआख "।

Abhishek said...

आपको भी बधाई ।

sanjaygrover said...

बाहर निकल कर क्या करना है सिद्धार्थ जी ! बाकी सबको भी वहीं बुला लीजिए। नीशु और सूरज खन्ना जी, आप भी थोड़ा-थोड़ा गुलाल मल लीजिए मेरी तरफ से। लेकिन नाक-कान-आंख वगैरह सभी छेद बंद करके, हां। अर्चना जी गिनीज़ बुक क्यों, हम अपनी देसी बुक बनाने वाले हैं। वैसे पता नहीं आपने क्या पूछा है और मैं पता नहीं क्या जवाब दे रहा हूं ! ####@@@&&&~~~~~!?

Harkirat Haqeer said...

Rang nahi tha Gulshan ji to socha khoon se hi khel lun pr yahan aa ke to eke do do ke char dikhte hain ...kya karun....? Aapne kahin blog me bhang ki goli vaigairah to nahi dal rakhi....?????

रवीन्द्र प्रभात said...

सही और सार्थक चर्चा की है आपने ....काफी मेहनत की है आपने दिखाई दे गयी । होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

sanjaygrover said...

तुसी कुज वी कहो हिकारत फकीर जी, तुआडे आण नाल समां बण जांदा ए। एस करके तुआडी झल्लियां वी मैंन्नू चंगियां लगदीयां ने।

Ravindra ji kya kareN, bachpan se hi mehnati aadmi haiN. HOLI MUBARAK.

MAYUR said...

होली की मुबारकबाद,पिछले कई दिनों से हम एक श्रंखला चला रहे हैं "रंग बरसे आप झूमे " आज उसके समापन अवसर पर हम आपको होली मनाने अपने ब्लॉग पर आमंत्रित करते हैं .अपनी अपनी डगर । उम्मीद है आप आकर रंगों का एहसास करेंगे और अपने विचारों से हमें अवगत कराएंगे .sarparast.blogspot.com

संगीता पुरी said...

नया अनुभव सी पी यू के अंदर जाकर... होली की ढेरो शुभकामनाएं।

Archana said...

ग्रोवर जी , मैने तो सीपीयू मे जाकर लिखा था ।
पढने के लिये आपके निर्देशों का पालन किजीये ।

sanjaygrover said...

ठीक है अर्चना जी, संशोधित निर्देशों के अनुसार मैंने अपना सिर, आंखों समेत, मानीटर में घुसेड़ दिया है।

हिमांशु । Himanshu said...

तैयारी के साथ की गयी इस पोस्ट के लिये धन्यवाद ।

राजीव तनेजा said...

बढिया है...लगे रहो

SAHITYIKA said...

bahut hi badhiya..
holi ka asali aanand aaya gaya ..
होली की हार्दिक शुभकामनायें

Harkirat Haqeer said...

लयो जी गुलशन जी असीं फेर आ गए समां बन्णन...! दस्सो कि कि ते कित्थे कित्थे बनिये ...??? होर दस्सो होली खेली ? रंग लगाया ?
चलो तुहानू होली दियां बहोत बहोत शुभकामनावां...!!

sanjaygrover said...

हिमांशुजी, राजीव तनेजा जी, साहित्यिका जी, हरिकीर्तन जी, आप सबको होली की बीलेटेड बधाईयां। हमने तो जितनी होली खेलनी थी ब्लाॅग पर ही खेल ली। अब वजह मत पूछना दोस्तो । ‘नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही.....’’ .जैसी कोई बात हो न हो, पर दर्दनाक ज़रुर है जी....
मयूर जी, आपके ब्लाॅग पर जाकर नवाबों पर टीपे छोड़ दी हैं......

Anonymous said...

hi..it is nice to go through your blog... by the way which typing tool are you using...?
recently..i was searching for the same and found.."quillpad". do you use the same...?

www.quillpad.in

keep writing...

jai Ho..

Puneet said...

बहुत खूब! आजकल ऐसी प्राचीन लिपि लिखने और पढ़ने वाले बचे ही कितने लोग हैं मुझे और आप को मिला कर बस चंद लोग हैं. मजा आ गया!
होली मुबारक हो आप को.

प्रदीप कांत said...

होली विशेषांक पसन्द आया
पर कौनसी लिपि है भाई?

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