रविवार, 15 मार्च 2009

‘ एक दिल बच्चों के जैसा है तुम्हारी खोज में ’

ग़ज़ल

कितनी उम्मीदें लगाकर आगईं फिर तितलियां

काग़ज़ी फूलों से धोखा खा गईं फिर तितलियां


मैंने सोचा फूल बन महकूँ जो उनकी राह में

खुशबू बन ख्वाबों में मेरे छा गईं फिर तितलियां


‘ एक दिल बच्चों के जैसा है तुम्हारी खोज में ’

इतना सुनना था कि बस शरमा गईं फिर तितलियां


कुदरती तानों की रौ में मैं जो इक दिन बह चला

मेरे सुर में सुर मिला कर गा गईं फिर तितलियां


इस चमन से उस चमन इस फूल से उस फूल तक

ज़िन्दगी के बीज कुछ बिखरा गईं फिर तितलियां

-संजय ग्रोवर

14 टिप्‍पणियां:

  1. ache se lika hai..

    umidh ke akash mein
    jab thitliya udthi hai
    jane kyun path hota nahi
    ki kon muskuratha hai, yeah dil!!

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  2. गुलशन-ऐ-शेर-ओ-सुखन है इस कदर महका हुआ
    कौन से गुल को चुनूँ chakara gayeen फिर titliyaan

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  3. वाह ! वाह ! क़ाबिले-दाद और ‘‘हासिल-ए-ग़ज़ल’’ शेर है, विवके जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. कुदरती तानों की रौ में मैं जो इक दिन बह चला

    मेरे सुर में सुर मिला कर गा गईं फिर तितलियां
    bahut sundar rachna!

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  5. संजय जी बेहतरीन ग़ज़ल कही है...लिखते रहें ऐसे ही...वाह..
    नीरज

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  6. वाह!! वाह बहुत बाड़िया..................
    अपने मेरी सुनी अब हमने बी आपकी रचनाए पदी बहुत आच्छा लिखते हॅ आप

    उत्तर देंहटाएं
  7. कितनी उम्मीदें लगाकर आगईं फिर तितलियां
    काग़ज़ी फूलों से धोखा खा गईं फिर तितलियां


    क्या बात है .पहला शेर .हम चुराये ले जा रहे है .....

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  8. आप जैसे डाॅक्टरों पर तो कई-कई शेर कुर्बान हैं, अनुराग भाई।

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  9. Minku ji, Vandanaji, Vivekji, Sandhyaji,Beautiful Nature ji,Neeraj ji, nehaji, Anuragji aap sabka bahut-bahut shukriya jo khaksaar ko itni shabashi bakhshi.

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  10. मेरे सुर में सुर मिला कर गा गईं फिर तितलियां....oji Gulshan ji aapne ab ye bagon k chkkar kyon lgane suru kar diye ...? hainji..?? ye me ab titalion k piche kyon pad gaye...tusin...??

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  11. कागजी फ़ूलों से जब धोखा खा गई तितलियाँ
    मानवी गुण को तब जान गई तितलियाँ

    चाहा जो अब महकना, फ़ूल बन के उनकी राहों मे
    अब तो मेरे ख्वाबों मे भी न आ रही वो तितलियाँ

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  12. kagzee phoolo se dhokha kh gyee titliya.....yaho zindagee hai...

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कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

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