गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

फिर तुझे क्या पड़ी थी बेवकूफ !?


1. फिर तुझे क्या पड़ी थी साले


तू किसी  गुट में है
जलेस में, प्रलेस में
है किसी में ?
तेरा कोई जानने वाला है मिनिस्ट्री में ?
किसी नेता से है तेरा दूर का भी कोई रिश्ता ?
पुलिस के महकमे में ही होता चलो कोई
साहित्य तक में नहीं तुझपर
किसी सिंह, किसी यादव,
किसी त्रिपाठी का हाथ

फिर तुझे सच बोलने की क्या पड़ी थी
बेवकूफ ?


2.
भई संभावनाएं तो हैं


संजय ग्रोवर ?
कौन संजय ग्रोवर ?
भई हमसे तो कभी मिला नहीं
अब यूं तो दस हज़ार कवि हैं दिल्ली में
हम किस-किसको जानते फिरें

संजय ग्रोवर
अच्छा वो जो यहीं दिलशाद गार्डन में रहता है
भला लड़का है
भई बाकायदा पैर छूता है मेरे तो
कई संपादकों के पास तो
मैं ही लेकर गया उसको
यहां मिलवाया, वहां छपवाया
हां याद आया

भई संभावनाएं तो हैं लड़के में !


-संजय ग्रोवर

(कादम्बिनी में प्रकाशित)

37 टिप्‍पणियां:

  1. भई संभावनाएं तो हैं लड़के में !

    nice

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  2. भई अच्छी कविताएँ हैं...सच में पहले सच बोलने के लिये हिम्मत चाहिये होती थी, अब पौवा चाहिये.

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  3. बढ़िया प्रस्तुति.....दोनों रचनाएँ सच को बताती हुई

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह भाई वाह!! बहोत ऊंची कहदी आपने तो।

    उत्तर देंहटाएं
  5. संजय ग्रोवर
    अच्छा वो जो यहीं दिलशाद गार्डन में रहता है
    भला लड़का है
    भई बाकायदा पैर छूता है मेरे तो
    कई संपादकों के पास तो
    मैं ही लेकर गया उसको
    यहां मिलवाया, वहां छपवाया
    हां याद आया

    भई संभावनाएं तो हैं लड़के में !

    बहुत बढ़िया ग्रोवर जी !

    उत्तर देंहटाएं
  6. चलो कुछ संभावनाएं तो हैं , खूबसूरत

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढिया सुन्दर रचनाएँ. पढकर लगा

    भई संभावनाएं तो हैं लड़के में !

    उत्तर देंहटाएं
  8. संभावनाएँ तो थी लड़के में, पर अब......

    उत्तर देंहटाएं
  9. भई संभावनाएं तो हैं लड़के में !!!
    जब तक व्यंग्य की दुलत्ती न पड़ जाये !
    बहुत बारीक़ कटाक्ष करते है ,साहित्य मफिओं
    पर चोट किया आपने ! ठ्न्धक मिली ! बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  10. @आलोक पुराणिक
    आपकी आत्म स्वीकृति अच्छी लगी। इस मकाम पर पहुंचकर बहुत कम लोग ही ऐसी हिम्मत कर पाते हैं:-)

    उत्तर देंहटाएं
  11. भई मजा तो आपके हर आलेख को पढ़ कर आता है लेकिन इसमे मजा के साथ ठहाका भी शामिल हो गया ...आभार ...

    उत्तर देंहटाएं
  12. @Usha Rai
    सहमति में हों चाहे असहमति में, आपकी बिंदास टिप्पणियां हमेशा ही अच्छी लगती हैं।

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  13. कठमगज हैं ससुरे जो सिर्फ सम्भावना देखते हैं - मुझे तो यह संजय ग्रोवर गुरु लगता है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. हा हा हा संजय जी कमाल लिखा है। व्यंग अच्छा लगा, पर लगता है कि आपको डर नहीं लगता कहीं

    किसी नेता से है तेरा दूर का कोई रिश्ता ?
    पुलिस के महकमे में ही होता चलो कोई
    साहित्य तक में नहीं तुझपर
    किसी सिंह, किसी यादव,
    किसी त्रिपाठी का हाथ

    फिर तुझे सच बोलने की क्या पड़ी थी
    बेवकूफ ?

    हाहाहाहाहहा

    उत्तर देंहटाएं
  15. जब आपको गिरिजेश ने गुरू कह दिया तो हो गए गुरू आप .जलेस प्रलेस को मारिये गोली . हमारे जैसे ' फलेस ' में शामिल हो जाईये .
    फलेस = फक्कड़ लेखक समुदाय { संघ नहीं } .

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  16. अब मैं क्या कहूं...जब बड़े-बड़े कह गए...तुझे क्या पड़ी थी... ?

    उत्तर देंहटाएं
  17. दोनों रचनायें अच्छी लगीं लेकिन 'अडोस पड़ोस ' का जवाब नहीं .
    लता 'हया'

    उत्तर देंहटाएं
  18. "किसी सिंह, किसी यादव,
    किसी त्रिपाठी का हाथ"

    वाह संजय ग्रोवर जी,
    बहुत ख़ूब,साफ़गोयी पसंद आई
    बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  19. संभावनायें तो थी लड़के में और अब तो दम भी है सच कहने का।

    उत्तर देंहटाएं
  20. sanjay sambhavnao ki hdd paar kar gaya ,,dekhte -dekhte kamaal kar gaya , uski soch me barkat hai -lekhni thodi tedhi hai per asar agni misail ki tarah saaf karti hai ,,,,,,badhai...kamna billore ,mumbai

    उत्तर देंहटाएं
  21. सर संभावनाएं तो हमें भी दिख गयीं हैं.बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  22. bahut sunder vah sarthak kavita.padhkar parsai vah sharad joshi yaad aa gaye.

    उत्तर देंहटाएं
  23. भई संभावनाएं तो हैं लड़के में !

    इसी लिये सच कहने लगा है क्या?

    उत्तर देंहटाएं
  24. delhi me rah kar bhi kisi singh,yadv,tripathi ka haat nahi hai to phir ladke me sambhvana kanhan hai ? lekin hai sambhvna kavita me hai.

    उत्तर देंहटाएं
  25. जी बिलकुल,,,
    ठीक और सटीक कहा है आपने
    काव्या के माध्यम से ऐसी गहरी बातें
    और वो भी ऐसी सरलता के साथ कह पाना
    बहुत मुश्किल और जोखिम भरा कार्य है
    और....
    आपकी लेखनी को सलाम !!

    उत्तर देंहटाएं
  26. Achcha bolg hai aapka.
    Kuch baatein, vaartalaap, vichaar pasand aaye.

    Kavitayein achchi lagi.

    Ashish
    http://ashishcogitations.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  27. are sanjay ji ase bebkufonki shreni me to kai bar hum bhi shami ho jate hai sir... or khas kr chhetr vad ke mude pr ... hum ne bhi kai bar khud se yahi kaha hai ki तुझे सच बोलने की क्या पड़ी थी
    बेवकूफ ?...pdha to asa laga jaise ap mujhse hi keh rahe hon....shukria.

    उत्तर देंहटाएं
  28. are sanjay ji ase bebkufonki shreni me to kai bar hum bhi shami ho jate hai sir... or khas kr chhetr vad ke mude pr ... hum ne bhi kai bar khud se yahi kaha hai ki तुझे सच बोलने की क्या पड़ी थी
    बेवकूफ ?...pdha to asa laga jaise ap mujhse hi keh rahe hon....shukria.

    उत्तर देंहटाएं
  29. are sanjay ji ase bebkufonki shreni me to kai bar hum bhi shami ho jate hai sir... or khas kr chhetr vad ke mude pr ... hum ne bhi kai bar khud se yahi kaha hai ki तुझे सच बोलने की क्या पड़ी थी
    बेवकूफ ?...pdha to asa laga jaise ap mujhse hi keh rahe hon....shukria.

    उत्तर देंहटाएं
  30. are sanjay ji ase bebkufonki shreni me to kai bar hum bhi shami ho jate hai sir... or khas kr chhetr vad ke mude pr ... hum ne bhi kai bar khud se yahi kaha hai ki तुझे सच बोलने की क्या पड़ी थी
    बेवकूफ ?...pdha to asa laga jaise ap mujhse hi keh rahe hon....shukria.

    उत्तर देंहटाएं
  31. शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
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