गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

मोहे अगला जनम ना दीजो ।


क्या करे इन हाथों का ? काट डाले इन्हें ? फेंक आए कहीं जाकर ? या हरदम ढंक कर रखे कहीं ? छुपा दे ! या किसी खुरदुरी चीज़ पर तब तक रगड़ता रहे जब तक दूसरे लड़कों की तरह मर्दाने, खुरदुरे, सख्त या गंठीले ना हो जाएं। तनहाई के छोटे से छोटे वक्फ़े में भी ये हीन भावनाएं, ये अपराध-बोध सरल का पीछा नहीं छोड़ते। किसी से हाथ मिलाने से भी डरता है, बचता है सरल। बीच-बीच में सुनने को मिल जो जाता है- ‘अरे यार, तुम्हारे हाथ तो लड़कियों से भी ज़्यादा मुलायम हैं।’'अगर रात अंधेरे में तेरा चेहरा देखे बगैर कोई तुझसे हाथ मिलाए तो यही समझेगा किसी लड़की का हाथ पकड़ लिया है।'


तिस पर दुबला-पतला-पीला शरीर। शर्मीला स्वभाव। तरह-तरह के फोबिया। ज़रा कुछ खट्टा या तला हुआ खाले तो खांसी, ज़ुकाम, पेटदर्द । महीने में 15 दिन बिस्तर पर गुज़रते हैं। धैर्य नाम की चीज़ से सरल का कोई वास्ता है नहीं। लोग उसकी चुप्पी और अवसाद को ही उसका धैर्य समझ लेते हैं तो उसका क्या कसूर। अशांति का महासागर ठाठें मारता रहता है सरल की छोटी-सी खोपड़ी में। बिस्तर में रहता है तो तरह-तरह की अच्छी बुरी कल्पनाएं और फंतासियां भी साथ रहती ही हैं।



कैसी-कैसी कल्पनाएं हैं सरल की ! एक ऐसी पोशाक बनवाए जिसमें से उसकी तो एक उंगली तक न दिखे पर वह सबको समूचा देख सके। कोई ऐसी कार मिल जाए उसे कि वह तो अंदर से सबको देखले पर उसकी किसी को झलक तक न मिले।



एक तो पड़ा-पड़ा जासूसी उपन्यास पढा करता है ऊपर से जाने किसने दे दिए हैं उसे ये फोबियाओं के उपहार। कहां से क्यों आ गया यह जानलेवा अपराध-बोघ! भयानक असुरक्षा की भावना। इस तरह लोगों से छुपकर, डरकर, शरमा कर अंधेरे कमरों की ओट में कैसे काटेगा वह अपनी ज़िंदगी !

(जारी)
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मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

कुंठा तू न गयी किसी मन से.......


कार्टून ठीक से न दिखता हो तो उसपर चूहे की चोंच से चिकोटी काटें-

शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

अंधेरों का कोरस यानि कि एक लीचड़ पैरोडी यानिकि डों‘ट टेक सीरियसली......



यारों सब धुंआं करो



मिलकर धुआं करो


बचे-ख़ुचे पर्यावरण को


धकेलो, दफ़ा करो


यारों सब धुंआं करो......






लोगों को दमा करो


चाहे अस्थमा करो


कानों को फ़ाड़ो बम से


अमन प दावा करो


यारों सब धुंआं करो....






पार्क को तबाह करो


तिसपे वाह-वाह करो


रोशनी को आग़ में डालो


नाचो, स्वाह-स्वाह करो


यारों सब धुंआं करो....






ओज़ोन पे आह करो


मौजों पे वाह करो


शांति को तलाक दे दो


शोर से निकाह करो


यारों सब धुंआं करो....






मिठाई जमा करो


ठूंसो-ठांसो, ठां करो


सुबह फ़िर हवा करो


और फ़िर दवा करो


यारों सब धुंआं करो....






(बतर्ज़: यारों सब दुआ करो....)
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ख़ुद फंसोगे हमें भी फंसाओगे!

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ढूंढो-ढूंढो रे साजना अपने काम का मलबा.........

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देयर वॉज़ अ स्टोर रुम या कि दरवाज़ा-ए-स्टोर रुम....