
आगे चलें। यानि कि थोड़ा पीछे जाएं।
जिस दिन तहलका नानावती आयोग की रपट के बाद अपने स्टिंग आॅपरेशन को लेकर एक प्रेस-कान्फ्रेंस कर रहा होता है उसी दिन दिल्ली के एक बाज़ार में दो आतंकवादी मोटर-बाइक पर आकर बम फेंक देते हैं। तहलका की प्रेस-काॅन्फ्रेंस उस में धुल जाती है।
थोड़ा और पीछे जाएं।
एक दिन देव-मूर्तियां दूध पीने लगती हैं। दूसरे दिन समुद्र का पानी मीठा हो जाता है। तीसरे दिन मरियम की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।
थोड़ा विश्लेषण करें।
एक कहता है कि बाबरी मस्जिद गिरी इसलिए 93 के दंगे हुए। दूसरा कहता है कि गोधरा हुआ इसलिए गुजरात हुआ।
एक कट्टरपंथ से ही दूसरा कट्टरपंथ जस्टीफाई होता है।
एक के रहने से ही दूसरे की ‘दुकान’ चलती है।
एक कट्टरपंथ नहीं होगा तो दूसरा क्या कहकर अपना औचित्य सिद्ध करेगा ?
अगर पाकिस्तान और मुसलमान ख़त्म हो जाएं तो बहुत सारे कट्टर हिंदुओं के तो ‘रोज़गार’ ही छिन जाएंगे। यही हाल हिन्दुस्तान के साथ होने पर पाकिस्तानी कठमुल्लों का होगा।
विभिन्न धर्मों के राजनेताओं के गठजोड़ तो ‘देव’ और ‘फ़िज़ा’ जैसी नई-पुरानी फ़िल्मों में दिखाए जा चुके हैं।
पर कट्टरमुल्लाओं का क्या ?
कट्टरपंथी और कठमुल्ला को जोड़कर यह (कट्टरमुल्ला) शब्द बनाया है। जिससे कि मुझे कोई धर्मविशेष का पक्षधर न समझ ले।
तो क्या एक संभावना यह भी हो सकती है कि कट्टरमुल्लाओं का कोई अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ हो जो कभी-कभी एक-दूसरे से हाथ मिलाकर भी काम कर लेता हो!
क्या कट्टरपंथी ऐसे ही सारी दुनिया को तबाह करते जाएंगे।
अगर हमें सचमुच देश की और मानवता की चिंता है तो हमें इन सवालों से भी दो-चार होना चाहिए।
अगर हमें सिर्फ नारेबाज़ी, अफ़वाहबाज़ी, तोड़-फोड़ और षड्यंत्रबाज़ी ही करनी है तो बात और है।
-संजय ग्रोवर
सही सही और खरी खरी कही आपने .
जवाब देंहटाएं( कृपया संभव हो तो वर्ड वेरीफिकेशन हटा दें )
aapne bahut hi acha lekh likha hai .. kais prshan uthathe hai ..
जवाब देंहटाएंbadhai
vijay
poemsofvijay.blogspot.com
अच्छा नया शब्द है !
जवाब देंहटाएंदो टुक बातें की हैं आपने और यह मुझे बहुत अच्छा लगा....
जवाब देंहटाएंआंयें-बाएँ-शायें से बेहतर है स्पष्ट चित्रण......
आप ब्लॉग पर आये सो ख़ुशी हुई मेरा सलाम भी क़ुबूल करें
जवाब देंहटाएंis soch ko apnaane ki zaroorat hai apne roz marra ki zindagi mein
जवाब देंहटाएंkalam ki taakat waalo ko aisa aur likhna chahiye...bina kisi fikr ke
main apne hostel mein ek saptaah tak har insaan ko aisi baatein samjhaane ki apni koshish kar raha tha..yakeenan aise mein tareef se zyaada gaaliyaan hi padengi(saamne nahi ji) par lage rehna hai :)
First of All Wish U Very Happy New Year....
जवाब देंहटाएंAap ne kaphi gahri bat kah di hai ...
Regards
vivekji,sappattiji,arvindji,rashmiji,sajal,dev aur Vinay ji, hausla badhaane ke liye shukriya aur naya saal sabko mubaraq ho.
जवाब देंहटाएंआपके चिंतन के विषय, सार और पात्रों से असहमत हूँ पर यह कहे बिना खुद को रोक नहीं पाता कि आपके व्यंग्य में ताजगी है और ताकत भी इसलिए पढने में मजा आया ।
जवाब देंहटाएंMere bhai 100% such likha hai.Kirdaron ki baat karen to choti aur dhadhi mein koi farak nahi milta.Dono nafrat farosh parallel bazar chala rahe hain aur unmad ki kamai kha rahe hain.Maara ja raha hai admi. Maine kabhi ik sher kaha tha
जवाब देंहटाएंIs Ram aur Rahim ke naamo ki larai mein yaro
Ik naam admi ka bhi tha bechara shaeed ho gaya
Bas ap jese kuch log andhere mein roshni ki kiran ho.
shaffkat