
ख़ुदको फिर से खंगालते हैं चलो,
आज क़ाग़ज़ संभालते हैं चलो
गर लगे, हो गए पुराने-से
ख़ुदको रद्दी में डालते हैं चलो
क्यूं अंधेरों को अंधेरा न कहा
रौशनी इसपे डालते हैं चलो
ज़हन जाना तो मार डालोगे
बात को कल पे टालते हैं चलो
सुन न पाओगे, कह न पाएंगे
एक फ़ोटो निकालते हैं चलो
30-11-2015
आदमी जैसी किसमें है श्रद्धा!
आदमी को ही पालते हैं चलो
02-12-2015
सच को मांगेगा! कौन पूछेगा?
फिर भी सिक्का उछालते हैं चलो
फिर भी सिक्का उछालते हैं चलो
कोई मुद्दा उछालते हैं चलो
यूंही अरमां निकालते हैं चलो
03-12-2015
-संजय ग्रोवर
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (04-12-2015) को "कौन से शब्द चाहियें" (चर्चा अंक- 2180) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
वाह!
जवाब देंहटाएंफ़ोटो निकालने का मतलब फ़ोटो खींचना ?
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