No east or west,mumbaikar or bihaari, hindu/muslim/sikh/christian /dalit/brahmin… for me.. what I believe in logic, rationality and humanity...own whatever the good, the logical, the rational and the human here and leave the rest.
गुरुवार, 2 अगस्त 2012
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बहुत खूब ... वाह!!
जवाब देंहटाएंखुद समझा हो काफी है
जवाब देंहटाएंजो भी उसका आशय था --- वाह !
वाह ....
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया संजय जी.....
लाजवाब गज़ल...यूँ भी छोटे बहर की गज़ल का अपना आनंद है..
अनु
sundar rachna...
जवाब देंहटाएंtruly beautiful
हटाएंbeautiful, loved reading...
जवाब देंहटाएंbahut baDhiyaa kaha...
जवाब देंहटाएंमुझको कुछ-कुछ गणित लगा
जवाब देंहटाएंवो कहता है परिणय था
.....:))
बहुत सुंदर ग़ज़ल है। बधाई!
जवाब देंहटाएंbahut hi sundar kavita...Congratulation..
जवाब देंहटाएंbahut hi sundar .............
जवाब देंहटाएंअच्छी प्रासंगिक ग़ज़ल है।
जवाब देंहटाएंवाह संजय भाई. बहुत खूब! बहुत बहुत ही खूब!!!
जवाब देंहटाएंवाह संजय भाई. बहुत खूब! बहुत बहुत ही खूब!!!
जवाब देंहटाएंमैंने सोचा पढ़कर देखूँ
जवाब देंहटाएंलेकिन वो 'संजय' था.
.... अंधों को जब 'संजय' सहजता से मिलते हों तब आँखों की चाहना नहीं रहती.
@Pratul vashisht
जवाब देंहटाएंवैसे विज़नविहीन आंखवालों को दुष्यंत का शेर ऑलरेडी समर्पित हैः
रोशन हुए चराग़ तो आंखें नहीं रहीं
अंधों को रोशनी का गुमां और भी ख़राब।
बहुत खूब...
जवाब देंहटाएंखूबसूरता गजल
जवाब देंहटाएंusko to khud se bhay thaa.bahut sundar gajal padvaee hai aapne,badhai deta hoon.
जवाब देंहटाएंusko to khud se bhay thaa,bahut sundar badhi.
जवाब देंहटाएंमुकुट बिहारी सरोज की पंक्तियां हैं-
जवाब देंहटाएंअक्षरों को अंक करके रख दिया है
तुम कसम से खूब साहूकार हो
kyaa baat hai,
जवाब देंहटाएंaaj pehli baar aapka blog padaa
dil keh oothaa..
VAAH !!
mujh ko kuchh kuchh Ganit lagaa,
vo kehtaa hai parinay thaa..
kitnee calculative, correct, and related to life thaught hai....just wow....
with your due permission i am inspired to write further :-
Pyaar vo andhaa kaisaa thaa
ootraa chashmaa tab saaf dikhaa....
Regards.
-renu ahuja.
नज़र जो कर सकती है दोस्त
जवाब देंहटाएंकैसे कर लेगा चश्मा!? :-)