मंगलवार, 22 मार्च 2011

फिर उसी कमरे में हूँ, मैं क्या करुं ?

ग़ज़ल

अब तलक सदमे में हूँ मैं क्या करुं ?
मैं बहुत ग़ुस्से में हूँ, मैं क्या करुं ?

जो मुझे सोने नहीं देता कभी
मैं उसी सपने में हूँ, मैं क्या करुं ?

तुमसा होके तुमसे मिल सकता नहीं
राज़ इक गहरे में हूँ, मैं क्या करुं ?

जो कभी भी लौटकर आता नहीं
मैं उसी वक्फ़े में हूँ, मैं क्या करुं ?

जो कबूतर-मार, शाखे-अम्न पे जलवानुमां
उसके मैं पहरे में हूँ, मैं क्या करुं ?

साल चौदह, बाल ख़ुशबू, बाग़े-जिस्म
फिर उसी कमरे में हूँ, मैं क्या करुं ?

यूं तो पूरा घर है मेरे बाप का
मैं भी इक कोने में हूँ, मैं क्या करुं ?

जो किसी विरसे का हिस्सा ही नहीं
मैं उसी विरसे में हूँ, मैं क्या करुं ?

दूसरों की बात कर सकता नहीं
आज फिर अपने में हूँ, मैं क्या करुं ?

-संजय ग्रोवर

33 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है जी बहुत ही अच्छा लगा आपका पोस्ट मुझे !हवे अ गुड डे !मेरे ब्लॉग पर बी आये !
    Music Bol
    Lyrics Mantra
    Shayari Dil Se
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  2. अब तलक सदमे में हूँ मैं क्या करुं ?
    मैं बहुत ग़ुस्से में हूँ, मैं क्या करुं ?...
    क्या अजीब बेचैनी है...? .....गुस्सा , सदमा,....विरसा ....होना नहीं चाहते लेकिन हैं वहीँ पर....अभी तक पूरी तरह इसे समझ नहीं पाया हूँ..हालाँकि कई बार पढ़ चूका हूँ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. जो कबूतर-मार, शाखे-अम्न पे जलवानुमां
    उसके मैं पहरे में हूँ, मैं क्या करुं ?

    साल चौदह, बाल ख़ुशबू, बाग़े-जिस्म
    फिर उसी कमरे में हूँ, मैं क्या करुं ?

    sahi kaha gaya hai upar wali comment me, bahut sara gussa aur bachainee dikh rahi hai aapke iss kavita me...ek meel ka patthar ..:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. दूसरों की बात कर सकता नहीं
    आप फिर अपने में हूँ, मैं क्या करुं ?

    sabhi sher eakse badhkar eak hai...bahut2 badhai

    उत्तर देंहटाएं
  5. भाई.....
    जो कभी भी लौटकर आता नहीं
    मैं उसी वक्फ़े में हूँ, मैं क्या करुं ?

    यह बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं...

    ग़ज़ल बहुत सुंदर है... टेक्नीकल रीज़न से कमेन्ट वहां नहीं पब्लिश हो पा रहा है...

    Mahfooz Ali
    (VIA EMAIL)

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  6. दूसरों की बात कर सकता नहीं
    आप फिर अपने में हूँ, मैं क्या करुं ?

    सुंदर स्टीक

    उत्तर देंहटाएं
  7. यूं तो पूरा घर है मेरे बाप का
    मैं भी इक कोने में हूँ, मैं क्या करुं ?

    बहुत खूब क्या शेर लिखें है बेहतरीन गज़ल नुमाया हुई.

    उत्तर देंहटाएं
  8. जो कभी भी लौटकर आता नहीं
    मैं उसी वक्फ़े में हूँ, मैं क्या करुं
    सुन्दर गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  9. जो मुझे सोने नहीं देता कभी
    मैं उसी सपने में हूँ, मैं क्या करुं ?
    क्या शेर कह दिया आपने वाह ~

    और..
    यूं तो पूरा घर है मेरे बाप का
    मैं भी इक कोने में हूँ, मैं क्या करुं ?
    बहोत खूब!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. यूं तो पूरा घर है मेरे बाप का
    मैं भी इक कोने में हूँ, मैं क्या करुं ?
    वाह!!! सुंदर शेर्

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्या बात बनायी है शिरिमानजी ने
    आलोक पुराणिक

    उत्तर देंहटाएं
  12. grover sahab....achchi ghazal kehna autna hi mushkil hai jitna achchi ghazal soochna........aap aik hi waqt main bohat umda aur bohat "yun hi sa" likhnay main itne mahir kyon hain......matlay ke bashamool aik aadh share aur bhi khoobsurat hai......magar baishtar kalaam gair moocoun hai...ye misra iss zameen main shamil kar ke aap ne mujhay apne hawale se bohat mashkook kar diya hai...

    जो कबूतर-मार, शाखे-अम्न पे जलवानुमां
    ye kaise mumkin hai ke shayar achchay bhale wazann ko choohd kar aesa tecnical bulender bhi kar sakta hai...

    उत्तर देंहटाएं
  13. इनके कुण्ठित कमेंटस् कई बार देखे हैं आपके ब्लॉग पर। दो निष्कर्ष मिले हैं। आवश्यक नहीं कि सफलता कुण्ठा को मिटा ही दे। दूसरा, जुगाड़ू लोग अकसर कुण्ठित होते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  14. यह Anonymous (अनामी) अपनी हरकतो से हटता नही...मैं क्या करुं ?
    वैसे रचना बहुत सुंदर हे

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर गज़ल है ! बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपके अश'आर पढ़कर यूँ लगा
    मैं किसी सपने में हूँ, मैं क्‍या करूँ।
    भाई, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है, एक-एक शेर पूरे मनोयोग से पिरोया हुआ।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  17. दूसरों की बात कर सकता नहीं
    आप फिर अपने में हूँ, मैं क्या करुं ?



    वाह, बहुत खूब!! क्या बात है..

    उत्तर देंहटाएं
  18. बहुत बढ़िया संजय जी,

    यूं तो पूरा घर है मेरे बाप का,
    मैं भी इक कोनें में हूं, मैं क्या करुं?

    उत्तर देंहटाएं
  19. जो कभी भी लौटकर आता नहीं
    मैं उसी वक्फ़े में हूँ, मैं क्या करुं ?
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! इस लाजवाब और उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  20. har sher behad umdaa aur gahre bhaav liye hue...
    अब तलक सदमे में हूँ मैं क्या करुं ?
    मैं बहुत ग़ुस्से में हूँ, मैं क्या करुं ?

    जो मुझे सोने नहीं देता कभी
    मैं उसी सपने में हूँ, मैं क्या करुं ?

    daad sweekaaren sanjay ji.

    उत्तर देंहटाएं
  21. harek pankti bahut khoobsoorat rachee aapne . badhaayi dil se .

    उत्तर देंहटाएं
  22. बेनामी नं.1 साहब, मैं आपकी सिर्फ एक बात से सहमत हूं, (जो कबूतर-मार, शाखे-अम्न पे जलवानुमां) मिसरे में वज़न वाली बात से। लेकिन शब्द कम करने पर मेरी बात पूरी नहीं आ पा रही थी। मैं लगातार कोशिश कर रहा हूं। जैसे ही नया मिसरा बनेगा, इसे बदल दूंगा।

    उत्तर देंहटाएं
  23. bahut hi khoobsurat rachna, jaisa socha tha usse kahin jyada behtar.

    shubhkamnayen!

    उत्तर देंहटाएं

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

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