शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

हवाएं टपकी तो लपके ठूंठ...

ग़ज़लें

1.
किसी का कुछ भी पता नहीं
किसी से कोई गिला नहीं

जो शख़्स समझा हो शख़्सियत
वो शख़्स अब तक मिला नहीं

वो शख़्स राहें बता गया  
जो शख़्स घर से चला नहीं

जड़ें तो क्या इन हवाओं से
वो पीला पत्ता हिला नहीं

हवाएं टपकी तो लपके ठूंठ
कमाल ये भी बुरा नहीं

इस आग़े-दिल को भी जांच लो
दिया अभी तक जला नहीं

वहीं पे ढूंढो तो कुछ मिले
यहां तो कुछ भी हुआ नहीं

ख़ुमार है तो उतार भी
दुआ से कुछ भी हुआ नहीं

उलझ गए मेरे रातो-दिन
ख़्याल का तो सिरा नहीं

वो शख़्स राहों में खो गया
जो अपनी जड़ से हिला नहीं 

2.

मकसद उसका जाने क्या था
यूं वो मेरे साथ खड़ा था

मेरा तन-मन कांप रहा था
सर पर उसका हाथ रखा था

जिनको भी वह कोस रहा था
सबको उसने साध रखा था

बेसिर-पैर की बातें करके
सर पर चढ़कर नाच रहा था

मैंने उसका काम न पूछा
मैं तो नीयत देख रहा था

सही वक्त पर सब कहना था
फिर क्या मेरे बाद रखा था

-संजय ग्रोवर

24 टिप्‍पणियां:

  1. यह ग़ज़ल महज अपने समय का बयान भर नहीं है । इसमें ऐसा कुछ है जो इस संश्लिष्‍ट और अर्थसघन बनाता है।

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  2. वो शख़्स राहें बता गया
    जो शख़्स घर से चला नहीं
    आज का यह सामाजिक सच है। राजनीतिक और धार्मिक सच भी। और…कोई शख्स इस जनम में आपकी शख्सियत समझ पाएगा--यह उम्मीद तो शायद किसी को करनी ही नहीं चाहिए। कहने-सुनने में बुरा लगता है, लेकिन हालत यह है कि स्वयं माँ भी अपने बच्चे की शख्सियत नहीं जान पाती है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. भाई संजय ग्रोवर जी, बेहद खूबसूरत और पुरखयाल ग़ज़ल पेश की है आपने| बधाई|

    ना अदावत हो ना दुश्मनी जिस जगह
    आदमी हो फकत आदमी जिस जगह
    अब वहीं जा के रहने को करता है दिल
    चैन से कट सके जिंदगी जिस जगह

    उत्तर देंहटाएं
  4. भाई संजय ग्रोवर जी, बेहद खूबसूरत और पुरखयाल ग़ज़ल पेश की है आपने| बधाई|

    उत्तर देंहटाएं
  5. वो शख़्स राहें बता गया
    जो शख़्स घर से चला नहीं

    जड़ें तो क्या इन हवाओं से
    वो पीला पत्ता हिला नहीं

    संजय जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल. ढेर साड़ी बधाइयाँ.

    उत्तर देंहटाएं
  6. sadhe sabdo me bahut pyari gajal...sanjay jee!!
    "main to niyat dekh raha tha.." :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. वो शख़्स राहें बता गया
    जो शख़्स घर से चला नहीं....

    बहुत खूब, एक और लाइन बहुत ज़्यादा पसंद आई, 'दुआ से कुछ भी हुआ नहीं'... बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  8. जड़ें तो क्या इन हवाओं से
    वो पीला पत्ता हिला नहीं

    हवाएं टपकी तो लपके ठूंठ
    कमाल ये भी बुरा नहीं

    उत्तर देंहटाएं
  9. वो शख़्स राहें बता गया
    जो शख़्स घर से चला नहीं
    सुंदर रचना!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. bahut sundar rachna , dil ko chhoo gayi kuchh panktiya jaise

    वो शख़्स राहें बता गया
    जो शख़्स घर से चला नहीं

    मैंने उसका काम न पूछा
    मैं तो नीयत देख रहा था

    सही वक्त पर सब कहना था
    फिर क्या मेरे बाद रखा था.

    thanks for such a nice post

    उत्तर देंहटाएं
  11. वो शख्स राहें बता गया ,जो घर से चला नहीं था ...
    सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  12. भाई संजय ग्रोवर जी
    तुम्हारी रचनाएँ पढ़ कर लगता है हिन्दी इतनी जल्दी मरने वाली नहीं है आज की हिन्दी को इद्ग्गाज दादाओं की आवश्यकता नहीं, तुम्हारे जैसे नौजवानों की जरूरत है | जो भाषा को नया मोड़ देसके और वह बोले जो आने आनेवाली पीढी सुनना चाहती है न कि हिन्दी की पंडिताई | तुम्हारे लिखने में ओरिजिनालिटी है जो वक्त की मांग है | तुम्हारी आवाज आज के फ़िल्मी गानों की तरह खोखली भी नहीं उसमें आगे आने वाले समय के द्रश्य है और पहुँच बहुत ऊंची है | मुझे उम्मीद है तुम हिन्दी को नयी ऊंचाइयों तक ले जाओगे | अभी तक रोज तुम्हारी रचनाये पढता था आअज हव्वाएं टपकी तो लपके ठूंठ पढी तो लगा क्क्यों न मैं भी मन की बात कह ही डालूँ |

    डा. सुभाष शर्मा,
    आस्ट्रेलिया से

    उत्तर देंहटाएं
  13. Sanjayji
    Llajawab gazab koi keh sakta nahin. An all-time super piece of work

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस आग़े-दिल को भी जांच लो
    दिया अभी तक जला नहीं

    ख़ुमार है तो उतार भी
    दुआ से कुछ भी हुआ नहीं

    मेरा तन-मन कांप रहा था
    सर पर उसका हाथ रखा था

    जिनको भी वह कोस रहा था
    सबको उसने साध रखा था

    मैंने उसका काम न पूछा
    मैं तो नीयत देख रहा था

    gajjab ki gajle hai sanjay sahab. kabhi hamare bhi aao na darjiling.

    उत्तर देंहटाएं
  15. ऐसा भी क्या घुन्नापन घुन्नी जी, अपना सही url तो दिया होता...

    उत्तर देंहटाएं
  16. छोटी बहर में बेहतरीन दो ग़ज़लें एक साथ और रचनात्मक सुंदरता के साथ उतने ही गहरे मानी लिए हुए.कई दिनों के बाद ज़हन की भूख सही से तृप्त हुई है जिसके लिए शुक्रिया
    वो शख़्स राहें बता गया
    जो शख़्स घर से चला नहीं
    उलझ गए मेरे रातो-दिन
    ख़्याल का तो सिरा नहीं
    वो शख़्स राहों में खो गया
    जो अपनी जड़ से हिला नहीं
    मैंने उसका काम न पूछा
    मैं तो नीयत देख रहा था..जनाब सही शेर दिल छुने वाले हैं ये तो बहुत याद रहेंगे .

    उत्तर देंहटाएं

कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते....

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